“यमुना” दिल्ली की सियासत के एक अभिन्न हिस्सा
योजनाएं नई पर यमुना की स्थिति वही !
यमुना का जल दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास का अहम मुद्दा रहा है। हर बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में अक्सर विपक्ष सत्ताधारी पार्टी को इसी मुद्दे पर घेरता है। पक्ष विपक्ष इस मुद्दों पर कई वादें करते है पर सच्चाई यह है कि यमुना का जल आज भी दुषित है। छठ पर्व के दौरान यह कई बार देखा गया है कि श्रद्धालु यमुना के जल और घाटों की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाते है। यमुना नदी के मुद्दे पर जब दिल्ली सरकार से सवाल पूछा जाता है तो जिम्मेदार दूसरे राज्यों को ठहराया जाता है। इसी मुद्दें को लेकर आज दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर यमुना के पानी जहरीला करने का आरोप लगाया है।
चलिए जानते है केजरीवाल के चार आरोप-
1.केजरीवाल ने कहा- हरियाणा की भाजपा सरकार ने वो काम किया है जो आज तक किसी ने नहीं किया। दिल्ली में पीने का पानी उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आता है हरियाणा से यमुना के सास्ते दिल्ली में पानी आता है। हरियाणा की सरकार ने दिल्ली के पानी में जहर मिलाने का काम किया है। वो तो भला हो दिल्ली के जल बोर्ड के इंजिनियर्स का जिन्होंने दिल्ली बार्डर पर ही पानी रोक दिया और उस पानी को दिल्ली के अंदर नहीं आने दिया।
2. दूसरा आरोप आरोप केजरीवाल की तरफ से यह है कि अगर यह दूषित पानी दिल्ली के अंदर आ जाता तो न जाने कितने लोगों की मौत हो जाती। और इस पानी की सफाई दिल्ली के अंदर लगे वाटर ट्रिटमेंट प्लांट में भी नहीं हो पाती। इस कारण से दिल्ली के एक तिहाई हिस्से में पीने की पानी की कमी हो गई।
3.तिसरा आरोप-केजरीवाल ने कहा- दिल्ली की सीएम आतिशि और पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस बारे में आयोग से शिकायत की है। मुझे उम्मीद है कि दिल्ली सरकार दिल्ली वालों को इस त्रासदी से बचाने में सफल रहेगी। यदि यह पानी दिल्ली में आता तो दिल्ली में कितने लोग मारे जाते यह एक सामूहिक नरसाहार होता।
4.चौथा आरोप में केजरीवाल ने दल्ली की जनता से ये कहा कि भाजपा गंदी राजनीति कर रही है, इस तरह की राजनीति दिल्ली में नहीं होनी चाहिए। बीजेपी जो काम दिल्ली में कर रही है इस तरह के काम दो देशों के बीच में टकराव के दौरान देखने को मिलती है। लेकिन भाजपा यह काम दिल्ली में कर के केजरीवाल को बदनाम करना चाहती है।
केजरीवाल के इन आरोपो पर हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने पलटवार करते हुए कहा आरोप लगाना और फिर भाग जाना उनकी पुरानी आदत और सोच है। मैंने कहा था कि आप अपने मुख्य सचिव को भेजिए और मैं अपने मुख्य सचिव से गुणवत्ता की जांच करने के लिए कहूंगा। उन्हें आरोप लगाने के बजाए काम करना चाहिए। दिल्ली के लोगो ने अपना मन बना लिय़ा है और वे उन्हें सबक सिखाएंगे।
यमुना के पानी को लेकर दिल्ली हरियाणा के बीच कितना पुराना है विवाद-
*1954 में यमुना जल समझौता हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच हुआ।
*इसमें हरियाणा को यमुना के जल का 77 प्रतिशत हिस्सा और उत्तर प्रदेश को 23 प्रतिशत तय किया गया।
*बाद में दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान ने भी दावा ठोका और विवाद गहरा गया।
*1993 में दिल्ली और हरियाणा के बीच जल समझौता हुआ।
*मुनक नहर के जरिए दिल्ली को जल देने के जरिए सहमति बनी।
*1994 में पांच राज्यों के बीच(दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान) के बीच यमुना के जल को लेकर समझौता हुआ।
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