लखनऊ में 500 साल पुरानी रामलीला का चल रहा मंचन

लखनऊ में 500 साल पुरानी रामलीला का चल रहा मंचन

 

राजधानी लखनऊ में ऐशबाग की ऐतिहासिक राम लीला कमेटी के अध्यक्ष हरिश चंद्र अग्रवाल जो की राम लीला का मंचन करते है। अध्यक्ष ने बताया की हम समाज को एक अच्छा संदेश देने का कार्य करता हूं । 150 साल पुराना रथ है अध्यक्ष ने बताया कि रथ 150 साल पुराना रथ है जो कि हमारे पूर्वजों का बनवाया हुआ है।हम इस रथ की बहुत सुरक्षा और इसका ध्यान रखता हूं,राम लीला होने के बाद इस रथ को स्थाई रूप से सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है और पुरातन से चला आ रहा ये कार्यक्रम लगातार चलता है और आगे भी लगातार चलता रहेगा।रामलीला का मंचन मनोरंजन के लिए नहीं होता है,राम लीला का मंचन समाज में एक अच्छा माहौल और सकारात्मक ऊर्जा के साथ साथ समाज को जागरूक करने का ज्ञान देने का कार्य करता है।

अध्यक्ष हरिश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि हमारे यहां रामलीला में लगभग 300 कलाकार अभिनय करते है। अध्यक्ष ने कहा कि इस बार ए आई के माध्यम से किए जाने वाले कार्य नहीं पर पाया लेकिन आने वाले समय में ए आई का प्रयोग कर रामलीला मंचन में अलग बदलाव करूंगा। राम लीला कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामोत्सव का कार्यक्रम हमारे यहां राम लीला मैदान ऐशबाग में 3 अक्टूबर से चल रहा था जो कि 14 अक्टूबर तक चलता रहेगा। 12 अक्टूबर को रावण दहन का कार्यक्रम चलेगा उसी के साथ 14 अक्टूबर को राम लीला का अंतिम दिन रहेगा।

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देश भर में कई जगहों पर रामलीला का मंचन किया जाता है और हर जगह की रामलीला की कुछ खास खूबियां होती है. ऐसे में ऐशबाग की रामलीला की एक अलग खूबी है मान्यता है की रामलीला ऐशबाग की स्थापना गोस्वामी तुलसी दास ने की थी. ये बात रामलीला समिति ऐशबाग के अध्यक्ष हरीश चंद्र अग्रवाल ने प्रेस वार्ता कर बताया उन्होंने कहा रामलीला मंचन को अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत करने का शुभारम्भ सोलहवीं शताब्दी से पूर्व संत गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा इसी रामलीला मैदान से प्रारम्भ किया गया था.श्री रामलीला समिति ऐशबाग उसी परम्परा को निरन्तर प्रतिवर्ष आधुनिक माध्यमो एवं संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रस्तुत करती चली आ रही है।

 

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